बेटी घर आयी है

Updated: Mar 29, 2021


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देखो आया अवसर पावन, स्नेह-विभोर घर का जन-जन, हर्षित उमंग जागा हर मन, आशीष छलकता है कण-कण,

नवज्योत घर पर छाई है, देखो! बेटी घर आयी है।


ओढ़े सम्मान का दुशाला, सौम्य, विनीत, स्फटिक प्याला, मधु-प्रेम ने है उसको ढाला, वो धीर, विवेकी, दक्ष बाला,

संस्कृति पग-पग लायी है, देखो! बेटी घर आयी है।


जगदम्ब-सूर्य के कानन में, विजया-भुवन के आँगन में, सकल माधुर्य भर कर मन में, इस मृदु-प्रकाश के प्रांगण में,

हर्षित श्रुति दी सुनायी है, देखो! बेटी घर आयी है।


यह कविता मेरी प्रिय भाभी के घर आगमन पर उनको समर्पित की गयी है।

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