ज्वलित बन तू

Updated: Mar 29, 2021


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सूक्ष्म सी चिंगारी बन तू टिमटिमा जुगनू के संग संग। ज्वाला का सामर्थ्य रख तू अपने भीतर, अपने कण-कण॥


नम्रता की लौ भी बन तू जलती-बुझती, कम्पित अंग-अंग। सौम्य ज्योत हर ओर भर तू रात्रि की कालिख में रोशन॥


प्रेरणा की अग्नि बन तू ज्वलित कर धरती का प्रांगन। आज अब कुछ ऐसे जल तू प्रबुद्ध हो हर मन का आँगन॥

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