ठण्ड की कहानी

यूँ तो हर मौसम की अपनी मनमानी होती है, पर ठण्ड की एक दिलचस्प ही कहानी होती है। धुंध से भीगी रातें तो रूमानी होतीं हैं, पर दिसंबर में सर्दी दंतकड़कड़ानी होती है॥ ठण्ड अपनी चादर हर ओर कुछ ऐसे फैलाता है, नाड़ी का खून enzyme नहीं, तापमान जमाता है। गर्मी की deficiency में रोज़ कौन नाहता है, यह जान कर deodorant मन ही मन इतराता है ॥ सर्दी अपने प्रस्ताव से हमारी हैरानी उकसाती है , इस मौसम में आँसू हमारी नाक बहाती हैं, ठण्ड से कांपते कदमों को आग की गर्मी जमाती है रजाई refugee camp सी नज़र