वोट बनाम नोट

चित्र श्रेय: डीएनए इंडिया निर्वाचन का बिगुल बजा, मच रहा था हाहाकार, गली-गली हर घर-घर में, मने उलझन का त्यौहार। “किसे चुनें, किसे सत्ता दें?” हर ओर था यही विवाद, हर भेंट, हर चर्चा का, बस चुनाव ही था संवाद। ऐसे में एक धूर्त नोट ने, लगाई एक वोट से स्पर्धा, “जग में किसकी माँग अधिक? किसकी है अधिक महत्ता?” शास्त्रार्थ का सेज सजा, न्यायाधीश प्रतिष्ठित आये, श्रोताओं में था कौतुहल, “विवाद क्या रंग दिखलाये?” नोट ने बड़ी तैयारी की, व्यवसायी सभी बुलाये, नोट के पक्ष से तर्क सुनाने संग वो अ